विचार

बाबा रामदेव और विवाद पर ठहरकर विचार करने की ज़रूरत

इन दिनों बाबा रामदेव अपने बयानों को लेकर न केवल डॉक्‍टरों के निशाने पर है बल्‍कि सोशल मीडिया पर भी जमकर ट्रोल हो रहे हैं। …
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कोरोना संकट में रो पड़ना तो अक्षम्य है, रो तो देश रहा है

भारत के प्रधानमंत्री एक विभाजित व्यक्तित्व के स्वामी मालूम होते हैं। जान पड़ता है उनकी कल्पनाओं में वास्तविकता के भिन्न भिन्न संस्करण हैं, किन्तु सोशल …
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दिलीप सी मंडल का सफाई अभियान कितना सही?

इन दिनों पत्रकार दिलीप सी मंडल फ़ेसबुक व ट्वीटर पर सफाई अभियान चलाए हुए हैं। अभिनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं अन्‍य क्षेत्रों से जुड़े लोगों के …
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कभी कभी लगता है इस्लाम एक रिलीजन या फलसफा या चेतना की धारा नहीं बल्कि एक राजनैतिक आंदोलन है.

इधर फिर से यरुशलम में इजराइल और फलस्तीन के बीच टकराव जारी है। वो एक दूसरी कहानी है। लेकिन इस्लामिक मनोविज्ञान पर पैनी नज़र रखने …
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तुम मत दुखी होओ. लेकिन जो दुःखी हैं, उन्हें आंसू बहाने दो.

मशहूर टीवी एंकर एवं पत्रकार रोहित सरदाना का आकस्‍मिक निधन के बाद मीडिया जगत में शोक की लहर है. रोहित महज़ 42 वर्ष के थे. …
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‘अगर आज भगत सिंह होते तो वो ज़ेल में होते’

कृष्ण जांगिड़ भगत सिंह के विचार, उनका किरदार पूंजीवादी और दक्षिणपंथी राजनीति के धुर विरोधी हैं। लेकिन तमाम तरह की वैचारिक मतभिन्नता होते हुए भी …
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भारत का युवा: वर्तमान और भविष्य

आज हमें इन चीज़ों की बहुत ज़रूरत है. भारत शांति और समृद्धि का देश रहा है. बुद्ध से लेकर गाँधी-नेहरू-अम्बेडकर का देश रहा है. ज़रूरत …
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