ब्लैक होल अपडेटेड इट्स प्रोफ़ाइल पिक्चर!

बीते कल तक “ब्लैक होल” के फ़ेसबुक पेज पर उसकी अपनी कोई तस्वीर नहीं थी!

अगर कोई आपसे पूछे कि 10 अप्रैल 2019 और 11 अप्रैल 2019 में क्या भेद है, तो आपको यही उत्तर देना चाहिए कि 11 अप्रैल 2019 को ब्लैक होल को अपनी एक तस्वीर मिल गई!

ब्लैक होल अपडेटेड इट्स प्रोफ़ाइल पिक्चर!

और इवेन्ट हॉराइज़ॉन टेलीस्कोप ने हमसे वादा किया है कि ब्लैक होल को जल्द ही उसकी डीपी बदलने का मौक़ा दिया जाएगा, क्योंकि हम जल्द ही बेहतर रेज़ॉल्यूशन की तस्वीर लेकर लौटेंगे। ख़ुशआमदीद!

गैलीलियो ने जब एक आंख मींचकर अपनी दूरबीन से सितारों का मुआयना किया था, तब से लेकर अब तक एक तारे को उसके मर जाने के बाद यों निहारना! ये देखने के इतिहास में अगला क़दम है!

तारे तरह-तरह से मरते हैं।

जो तारे बहुत बड़े होते हैं, उनका बड़प्पन ये है कि वो मरने के बाद अपने भीतर धंस जाते हैं। जैसे कोई चिट्‌ठी लिखे बिना दुनिया से रुख़सत होता हो।

अलबत्ता मैं ये नहीं कहना चाहूंगा कि मरने के बाद “सुपरनोवा” वाली आतिशबाज़ी का मुज़ाहिरा और इश्तेहार करने वाले सितारों में किसी क़िस्म का छोटापन होता है। बस ये कि ये ही उनकी तासीर होती है। ये उनका किरदार होता है।

हमारा जो सितारा है, जिसको हम भूल से सूरज कहते हैं, मरने के बाद महज़ एक सफ़ेद बौना (व्हाइट ड्वार्फ़) बनकर रह जाएगा, वो ब्लैक होल नहीं बनेगा। ब्लैक होल बनने के लिए उसके द्रव्यमान का अपने मौजूदा आकार से कम से कम बीस गुना अधिक होना आवश्यक है।

11 अप्रैल के सूरज को जब यह इत्तेला दी गई तो उसने मुंह बिदकाकर कहा- “लेकिन भला क्यूं? केवल इसीलिए कि आपके पेज पर एक डीपी अपडेट की जा सके? शुक्रिया, लेकिन मेरे पास पहले ही अनेक प्रोफ़ाइल तस्वीरें हैं, समुद्र पर सूर्यास्त वाली। मुझे ब्लैक होल बनने का शौक़ नहीं।”

बात वाजिब है। और वैसे भी हमारा सितारा, माफ़ कीजिएगा, हमारा सूरज हमारे परिवार का मुखिया है, उससे ज़्यादा बहस करना मुनासिब नहीं। के वो पहले ही बड़ा आगबबूला रहता है!

लेकिन ये सच है कि एक सितारे के भीतर हमेशा एक जद्दोजहद चलती रहती है! और केवल फ़िल्मी सितारे के भीतर ही नहीं!

फ़िज़िक्स के आलिम कहते हैं कि ये ऊर्जा और गुरुत्वाकर्षण की कशमकश है, जिसमें जब सितारा बहुत बड़ा होता है तो उसकी ग्रैविटी भी इतनी पुरक़शिश हो जाती है कि वो मरते हुए सितारे को अपने भीतर खींच लेती है। तब वो दुनिया का सबसे सघन कोना बन जाता है, जिससे रौशनी भी रिहा नहीं हो सकती।

जिससे रौशनी रिहा नहीं हो सकती, उसकी तस्वीर आप कैसे खींच सकते हैं?

बिलकुल नहीं खींच सकते। लेकिन ब्लैक होल के फ़ेसबुक पेज पर जो डीपी अपडेट हुई है, वो झूठी नहीं है। उसमें “इवेन्ट हॉराइज़ॉन” की ललाई है, जो एक ब्लैक होल का घेरा बनाती हैं।

ये जो इवेन्ट हॉराइज़ॉन है, ये आकाश में पड़ी भंवर है, एक व्हर्लपूल है, जिसके बाद आपने ब्लैक होल में दाख़िल होना होगा, वहां से कभी लौटकर नहीं आने के लिए। या कौन जाने, जैसा कि स्टीफ़न हॉकिंग ने कहा था, ब्लैक होल से बाहर निकलने का कोई रास्ता हो ही।

ये वो ही स्टीफ़न हॉकिंग था, जिसका अपना भौतिक अस्तित्व किसी खूंटे पर टंगी कमीज़ से ज़्यादा नहीं रह गया था, केवल इसीलिए कि वो रात-दिन ब्लैक होल्स के बारे में सोच सके। वो ब्लैक होल्स पर फ़िदा था! काश, वो आज ये तस्वीर देखने को ज़िंदा रहता!

आइंश्टाइन जिसको “डार्क स्टार” कहता था, ब्लैक होल के केंद्र में “सिंगुलैरिटी” का जो यूटोपिया है, उसके बारे में सोचते-सोचते ही स्टीफ़न हॉकिंग की अंगुलियां जवाब देने लगी थीं और उसके पैर अकड़ गए थे। लेकिन उसने अपनी किसी किताब में ये नहीं लिखा कि एक अंधेरा कुआं मेरी आत्मा के भीतर भी है!

इवेन्ट हॉराइज़ान टेलीस्कोप ने जो तस्वीर जारी की है, वो ब्लैक होल का सिलुएट है, तिमिर-चित्र है, जो इवेन्ट हॉराइज़ान के ताप से निर्मित होता है। वास्तव में वो एक गोलाइयों वाली फ्रेम है। एक साइंटिस्ट ने मज़ाक़ में कहा, जैसे जाड़ों में हथेलियां रगड़ने से वो लाल हो जाती हैं, उसी तरह।

ख़ुशी के मौक़े पर आप दिल्लगी करने लगते हैं!

लिहाज़ा एक और साइंसदां ने टिप्पणी की- चालीस हज़ार लोग अपने जीवन में जितनी सेल्फ़ियां खींचेंगे, उसके कुल डाटा से ब्लैक होल की ये तस्वीर बनाई गई है। ग़रज़ ये कि देखिए, आप कितनी सारी सेल्फ़ियां खींचते हैं! बाज़ आइये!

मुझे यक़ीन है, इन चालीस हज़ार में से कुछेक ऐसे भी होंगे, जो इतनी सेल्फ़ियां नहीं ही खींचते होंगे। इस लतीफ़े में रिलेटिविटी की जो इनकंसिस्टेंसी है, उससे आइंश्टाइन नाराज़ हो सकता था। अलबत्ता ब्लैक होल की तस्वीर पर मीम्ज़ की जो बाढ़ आई हुई है, उन्हें पढ़कर तो वो शायद आंख दबाकर खीसें ही निपोरता।

बहरहाल, कुल मिलाकर सच तो यही है कि ब्लैक होल को अब अपनी डीपी मिल गई है। सेल्फ़ी ना सही। क्या फ़र्क़ पड़ता है। सेल्फ़ी तो मरने के बाद सफ़ेद बौना बनने वाले सूरज के पास भी नहीं है!

लेकिन ये एक ख़ूबसूरत तस्वीर है। इस तस्वीर की मुबारक़बाद उन सभी को, जो दुनिया को एक बड़ा गांव-मुलुक मानते हैं और उसकी क़ामयाबियों को अपना मानकर उसमें शरीक़ होते हैं। जिनके अपने मुख़्तलिफ़ गांव-मुलुक हैं, उनकी बात नहीं करता!

हम अदना इंसानों ने वैसी एक तस्वीर खींची, ये सोचकर ख़ुश होना– यही तो बड़प्पन भी है ना!

उस बड़े-से सितारे जैसा बड़प्पन, जिसे मरने के बाद चुपचाप अपने भीतर धंस जाना है और बन जाना है एक सुपरमैसिव ब्लैक होल!

सुशोभित सक्‍तावत

  • (स्वतंत्र लेखक)

स्पष्टीकरण: कुमार श्‍याम डॉट इन हर पक्ष के विचारों और नज़रिए को अपने यहां समाहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह आवश्‍यक नहीं है कि हम यहां प्रकाशित सभी विचारों से सहमत भी हों। लेकिन ऐसे स्वतंत्र लेखक और स्तंभकार जो कुमार श्‍याम डॉट इन पर लिखते हैं, हम उनके विचारों को मंच देते हैं लेकिन ज़वाबदेह नहीं हैं।

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