सपना के साथ ऐसा क्‍या हुआ?

कल से सपना चौधरी के कांग्रेस में शामिल होने की ख़बरें आ रही हैं। अनेक तस्‍वीरें भी हैं। बाक़ायदा ज्‍वॉइनिंग-फॉर्म भी सार्वजनिक है। और कांग्रेस के प्रमुख नेता राज बब्‍बर तक आगमन पर स्‍वागत कर चुके हैं।

आज सपना ने प्रेस कॉन्‍फ्रेस कर कहा कि उन्‍होंने कांग्रेस ज्‍वॉइन नहीं की है। न ही चुनाव लड़ेंगी और न ही प्रचार करेंगी। तस्‍वीरों के बारे में पूछा गया तो पुरानी कहकर पल्‍ला झाड़ती नज़र आयीं।

सपना से यह सवाल पूछा जा सकता है कि यदि तस्‍वीरें पुरानी हैं तो क्‍या उन्‍होंने पहले कभी कांग्रेस ज्‍वॉइन की थी? लेकिन सब जानते हैं कि तस्‍वीरें कल की हैं। तमाम प्रमाण हैं।

फिर रात में ऐसा क्‍या हुआ कि सपना को यह फ़ैसला लेना पड़ा लेकिन बेहद ‘हास्‍यास्‍पद’ बहानों के साथ?

मैं इसे हास्‍यास्‍पद नहीं कहूंगा। बल्कि ख़ौफ़नाक कहूंगा। इतना बड़ा यू-टर्न कोई ऐसे ही नहीं ले सकता। कुछ तो ऐसा असामान्‍य हुआ है, जिसने सपना को भयभीत किया है। कोई गहरा दबाव है जो सपना के चेहरे पर स्‍पष्‍ट झलक रहा है। आप प्रेस-काॅन्‍फ्रेस में उनकी हड़बड़ाहट से अंदाज़ा लगा सकते हैं।

राजनीति बेहद क्रूर होती है। एक ग़ैर-राजनीतिक लड़की को न जाने किसने इस दुविधा में धकेल दिया है। सपना डरी हुई है।

इसके अलावा कल से सपना पर अश्‍लील टिप्‍पणियां हो रही हैं। कुछ तो भाजपा के विधायक शामिल हैं। ये नर्तकी राजनीति करेगी? लेकिन मैं पूछता हूं क्‍या यह प्रश्‍न भारतीय राजनीति में कोई महत्‍व रखता भी है? जहां बलात्‍कारी, भ्रष्‍टाचारी, हत्‍यारे और नरसंहारक राजनीति कर सकते हैं तो क्‍या एक नर्तकी राजनीति नहीं कर सकती? लेकिन कुछ ख़ास किस्‍म के लोगों की पशुता केवल बहानों के इंतज़ार में रहती है और बेशर्मी से फूट पड़ती है।

हां, सपना का राजनीति से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। उनका सिर्फ इस्‍तेमाल ही किया जा रहा है ! लेकिन हेमा मालिनी और मनोज तिवारी के अलावा अन्‍य लोगों को भी न भूलें। ये प्रश्‍न उठाए जा सकते हैं। लेकिन सपना के साथ इन चौबिस घण्‍टो में जो हुआ है, वह हतप्रभ करने वाला है। मुझे तो कुछ गड़बड़ लग रही है। बाक़ी सच्‍चाई सामने आएगी तब मालूम होगा।

कांग्रेस को जिम्‍मेदारी पूर्वक यह स्‍पष्‍ट करना चाहिए। सपना से बात करें। सरकार को चाहिए कि सपना की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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