मोदी जी की फ़क़ीरी !

ये तस्‍वीरें प्रधानमंत्री मोदी के आधिकारिक फ़ेसबुक ख़ाते से ली हैं. समुद्र किनारे टहल रहे हैं. मैं इन तस्‍वीरों को देखता ही रह गया. मोदी जिस भाव-भंगिमा में दिख रहे हैं और फ़ोटोग्राफ़र ने जिन पक्षों से फ़ोटो ली हैं, उससे इन तस्‍वीरों का महत्‍व और बढ़ जाता है. ये तस्‍वीरें लाखों-करोड़ों मोबाइल्‍स एवं लैपटॉप्‍स तक पहुंचेगी. मोदी समर्थक इन्‍हें प्रोफ़ाइल पिक्‍चर या वॉलपेपर बनाएंगे. इसके अलावा आईटीसेल को पोस्‍टर बनाने के लिए इन से बेहतर तस्‍वीरें नहीं मिल सकतीं.

इसके पीछे गहरा मनोविज्ञान है. भाजपा पिछले बरसों से सिर्फ़ इसी पर काम कर ही है. पहले मीडिया को अपने पाले में किया गया. करोड़ों घरों तक मोदी की करिशमाई छवि बनाकर पहुंचाई गई. मोदी सरकार इवेंट दर इवेंट आयोजित करती है. जिसमें में वो मोदी को एक अवतार-पुरुष के रूप में प्रकट करने की कोशिश करते हैं. उसी तरह तस्‍वीरें उतारी जाती हैं. प्रयास ये है कि जनमानस में मोदी की एक ‘फरिश्‍ते’ की छवि बना दी जाए. जो उन्‍होंने सीरियल्‍स में देखी है. ठीक वैसी ही वेशभूषा में ख़ुद को दिखाते हैं. वैसी ही देहभाषा.

दरअसल, हमारे पड़ोस में ही कुछ लोग मोदी को विष्‍णु का अवतार मानते हैं. जबकि देशभर में तो बहुत होंगे. हालांकि उनका दोष नहीं है.

देवी-देवताओं की तस्‍वीरों को फ़ोटोशॉप से डिज़ाइन करके बनाया जाता है. हर एक क्रिया कम्‍प्‍यूटरीकृत होती है. मोदी यह ख़ालीपन छोड़ना नहीं चाहते. वो ख़ुद हर गतिविधि कर लेना चाहते हैं, जैसी आने वाले समय में लोग कल्‍पना करे. यदि कोई फ़िल्‍म भी बने तो एक्‍टर को अधिक श्रम करना न पड़े.

इस दिशा में मोदी की केदारनाथ यात्रा एवं डिसकवरी चैनल पर कार्यक्रम आदि गिन सकते हैं. मोदी ख़ुद को फ़क़ीर की तरह पेश करते हैं. कि देश उन्‍हें फ़क़ीरी की वज़ह से याद करे.

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