‘क्‍या अब हिन्‍दू इस बदजुबान और नफ़रती आदमी के पीछे चलेगा?’

Yeti-Narsinghanand-Saraswati

इन दिनों एक महंत काफ़ी चर्चित में है। डासना के मंदिर में पानी पी लेने की वज़ह से आसिफ़ नाम के लड़के को बेरहमी से पीटा गया तो इस कृत्‍य को ज़ायज ठहराने वालों में सबसे प्रमुख नाम इसी महंत यति नरसिम्‍हानंद सरस्‍वती का था। किन्‍तु इतना ही नहीं। यह व्‍यक्‍ति मुसलमानों से इतनी आकंठ घृणा करता है कि वो सरेआम उनके लिए अपशब्‍दों का इस्‍तेमाल करता है। उदाहरणस्‍वरूप इसके वीडियोज़ सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं।

कुछ दिनों पहले एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें यह महंत देश के पूर्व राष्‍ट्रपति और मिसाइल-मैन एपीजे अब्‍दुल कलाम के संबंध में अनेक निराधार एवं आपत्‍तिजनक बातें कर रहा था। कलाम सबसे बड़ा ‘ज़ेहादी’ था, अमेरिका में उनकी नंगे करके तलाशी हुई और उनके रहते अनेक हिन्‍दू वैज्ञानिकों की हत्‍याएं हुईं, वगैरह-वगैरह।

न केवल यही वीडियो बल्‍कि अनेक ऐसे भाषण हैं जिनमें यह महंत स्‍पष्‍टरूप से मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर उगल रहा है और नफ़रत की खेती कर रहा है। लेकिन सरकारों की ओर से कुछ भी नहीं किया जा रहा। हालांकि एक बड़ा वर्ग इस महंत की बातों से सहमति रखता है और इसकी बातों का समर्थन भी कर रहा है।

यति नरसिम्‍हानंद सरस्‍वती हददर्जे़ का बदजुबान और ज़हरीला व्‍यक्‍ति है।

अभी नया विवाद खड़ा और हो गया है कि एक प्रेस-कॉन्‍फ्रेंस का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें यह महंत मुसलमानों के नबी मुहम्‍मद पैंगबर के बारे में ‘आपत्‍तिजनक भाषा’ का इस्‍तेमाल कर रहा है। जिसको लेकर आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह ख़ान ने जामिया नगर पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज़ करवाई है। द हिंदू अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि अमानतुल्लाह ख़ान का आरोप है कि महंत ने पैग़ंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ अपमानजक भाषा का इस्तेमाल किया है और मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

यहां तक ठीक है कि अमानतुल्‍ला उसके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज़ करवा सकते हैं और क़ानूनी जो भी रास्‍ता है, उसका उपयोग कर लड़ाई लड़ सकते हैं। लेकिन अमानतुल्‍ला ख़ान ने उस वीडियो को शेयर करते हुए ट्वीट में जिस भाषा का इस्‍तेमाल किया है, वो भी आपत्‍तिजनक और ग़ैरक़ानूनी है।

अमानतुल्‍ला ने लिखा-

हमारे नबी की शान में गुस्ताख़ी हमें बिल्कुल बर्दाश्त नहीं, इस नफ़रती कीड़े की ज़ुबान और गर्दन दोनों काट कर इसे सख़्त से सख्‍़त सज़ा देनी चाहिए। लेकिन हिंदुस्तान का क़ानून हमें इसकी इजाज़त नहीं देता, हमें देश के संविधान पर भरोसा है और मैं चाहता हूं कि दिल्‍ली पुलिस इसका संज्ञान ले।

यह हिंसक भाषा का ज़ायज है? बिल्‍कुल नहीं। हिन्‍दुस्‍तान का क़ानून इजाज़त नहीं देता, वरना तो यह सब कर देते। फिर आगे लिखते हैं कि हमें देश के संविधान में भरोसा है? कहां भरोसा है?

इसलिए देश के आम एवं अमनपसंद लोगों को इन दोनों ओर के हिंसक भाषा उपयोग करने वालों से सावचेत रहना चाहिए। न आप मुसलमानों के नाम पर कुछ भी बोल सकते हैं और न ही ‘पैंगबर की शान में गुस्‍ताख़ी’ के नाम पर कुछ भी बोल सकते हैं। यह देश आप जैसे अतिवादियों और नफ़रत के सौदागरों का नहीं बल्‍कि अमन और चैन की बात करने वालों का है। कहना बस इतना है कि हमें हिन्‍दू या मुसलमान होकर नहीं सोचना चाहिए। अन्‍यथा परिप्रेक्ष्‍य धुंधले नज़र आएंगे।

एक बात क़ायदे की। वैसे हिन्‍दुओं के पास अच्‍छे लोगों की कमी नहीं है कि वो यति नरसिम्‍हानंद जैसे बदजुबान और नफ़रती व्‍यक्‍ति के पीछे चलें और उसके हर बेहुदे बयानों के समर्थन में आ जाएं। क्‍या इतनी बौद्धिक कंगाली आ गई है कि हिन्‍दू-समाज अब ऐसे लोगों के नेतृत्‍व में चलेगा? मुझे मालूम है कि इस व्‍यक्‍ति के पीछे जो लोग हैं, वो मुठ्ठीभर हैं। लेकिन सवाल उन मुठ्ठीभर लोगों का ही है कि आख़िर उनमें ज़रा भी सावचेती या चेतना नहीं। जो व्‍यक्‍ति सार्वजनिक रूप से अश्‍लील भाषा का इस्‍तेमाल कर सकता है, वो कैसे आपका सम्‍मान सुरक्षित रख सकता है? यह आत्‍ममंथन का समय है।  











One comment

  • Lalit Chaudhary says:

    तुम जैसे सेकुलर कीड़ो ने धर्म का नाश करवा दिया। हमे अच्छा दिखने का ढोंग नही करना है। और इन मुस्लिम रूपी राक्षष् का अंत जरूरी है। स्वामी अपनी जगह पर सही है

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