ग़लती से बॉर्डर पार कर आया पाकिस्‍तानी बच्‍चा, बीएसएफ ज़वानों ने चॉकलेट खिलाकर वापस भेजा

the-eight-year-old-karim-arrived-in-india-by-mistake-bsf-hands-over-to-pakistani-rangers

यह दुनिया भले कितनी ही क्रूर और असंवेदनशील हो जाए। भले ही बुरे का डंका बजे और शरीफ़ बार-बार मुंह की खाए किन्‍तु इस मानवता को हमेशा अच्‍छे और भलेमानुषों की प्रतीक्षा रहेगी। बेबस और स्‍वप्‍निल आंखें सुंदर और अधिक मानवीय पहलू की ही बाट जोहेगी। भारत और पाकिस्‍तान दोनों मुल्‍क़ों के बीच नफ़रत और दुश्‍मनी पैदा करने की कोशिशें बरसों से होती रही हैं और दोनों मुल्‍क़ अपने रिश्‍तों की बेहद ख़राब स्‍थिति से गुजर रहे हैं। ज़मीन पर खींची लक़ीर को दिलों में भी खींचने की सियासी कोशिशों ने अपना मुक़ाम हासिल किया है और दोनों देशों की आवाम के दिलों में एकदूजे के प्रति नफ़रत भरने में क़ामयाबी पाई है। लेकिन कुछ वाकयात ऐसे घटित होते हैं जो हज़ारों बुरी कहानियों पर बस एक सुंदर कहानी पानी फेर जाती है।

भारत के बीएसएफ के ज़वानों का बेहद मानवीय एवं करुणामयी चेहरा सामने आया है। दरअसल शुक्रवार शाम क़रीब 5.20 बजे एक 8 वर्षीय बच्चा अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर बीएसएफ़ की 83 वीं बटालियन के BoP सोमरत के बॉर्डर पिलर नंबर 889/2-S के पास भारतीय सीमा में प्रवेश कर गया। यह बच्‍चा पाकिस्‍तान के नगर पारकर का रहने वाला है। जिसकी शिनाख्‍़त यमनू ख़ान के बेटे करीम के रूप में हुई। सरहद पार कर जाना ख़तरे से ख़ाली नहीं होता। ये सरहद भारत-पाक की है ज़नाब। यहां पंछी भी बिना इज़ाजत इधर से उधर पर नहीं मार सकते। ये तो इंसान की औलाद। करीम को बीएसएफ के ज़वानों ने पकड़ लिया। करीम डर गया और रोने लगा। 8 बरस की ज़ान दुश्‍मन देश की आर्मी के हाथों में। स्‍वाभाविक ही था कि वो डरता। लेकिन ये हाथ भारतीय थे। ज़वानों ने ग़रीब बालक को खाना खिलाया, मनाया और चॉकलेट खिलाई। उसके बाद पाक रेंजरों के साथ एक फ्लैग मीटिंग बुलाई और उन्हें नाबालिग के पार होने की जानकारी दी। क़रीब 7.15 बजे बच्चे को वापस पाकिस्तानी रेंजर्स को सौंप दिया गया। कितना सुखद है यह।

हम आपस में चाहे कितने ही क्‍यों न बंट जाएं लेकिन अंतिम मानवीय भावना, करुणा और स्‍नेह बचा रहे तो शुभ। भारतीय ज़वानों ने करीम को वापस भेजकर इस भावना को ज़िंदा रखा है और भारत के मौलिक गुण को भी चरितार्थ किया है। हमने लक़ीरें खींच दी तो क्‍या? बालमन में अभी कहां इन रेखाओं का भान है? मैं तो कहूंगा ऐसी मिसालें ही हमें एकदूजे के क़रीब लाएंगी। दिलों में भरे विष को मंद्धम करेगी और फिर से अमन के गीत गाए जाएंगे।

अब पाकिस्‍तान को भी दरियादिली दिखानी चाहिए। बाड़मेर के ही बिजराड़ थाना क्षेत्र का 19 वर्षीय युवक गेमाराम मेघवाल पिछले साल 4 नवंबर को अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गया था। पाकिस्तान ने उसे अभी तक भारत को सौंपा नहीं है। यह तो ठीक नहीं। दिल बड़ा करो। इन आमजन से क्‍या लोगे? भोलेभाले लोगों को अपनों से दूर करके या उन्‍हें प्रताड़ित करके क्‍या हासिल कर लोगे?

यही उम्‍मीद है कि जैसा भारत ने मानवीय सुलूक किया। वैसा ही पाकिस्‍तान करेगा और गेमाराम वापस अपने देश लौटेगा।




    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *