‘प्रसून’ कभी नहीं मुरझा सकता !

पुण्‍य प्रसून बाजपेयी जी को फिर टीवी चैनल से बेदख़ल कर दिया गया है। आज तक से इस्‍तीफ़ा हुआ। फिर एबीपी न्‍यूज़ से निकाला गया, और अब सूर्या समाचार से भी। कारण बस एक ही, इन्‍होंने सरकार की आलोचना की।

यह जानकर हैरत होती है कि विश्‍व के सबसे बड़े ‘लोकतंत्र’ में एक पत्रकार से इतना डर? जब डराने, धमकाने और मार देने की धमकी से काम नहीं चला तो आखिरकर मालिकों से करोड़ों की डील कर चैनल से निकाल देने का प्रक्रम शुरू हुआ है। कौन है जो इतना भयभीत है? कौन वो जिसकी सांसें थम जाती है, जब वो स्‍क्रीन पर हाथ मलते हुए बोलना शुरू करते हैं। आप जानते हैं लेकिन आप भी अंदर से डर हुए हैं। यह डर ठीक नहीं है। एक दिन आपका यही डर इस अर्जित किए मुल्‍क़ के ख़ात्‍में का कारण बनेगा।

आजकल दिल्‍ली की मीडिया गांवों में नहीं आती। कुछ लोग हैं जो यह हिमाक़त करते हैं। और जब असलीयत स्‍क्रीन पर रेंगती है तो सत्‍ता की भृकुटी तन जाती है। याद रखिए जो असलीयत पुण्‍य प्रसून जी दिखा रहे थे, वह आपके बच्‍चों के भविष्‍य और आपके वर्तमान से जुड़ी हुई थी। और शायद वो दिन अब दूर नहीं जब हर पत्रकार आपकी राह भूल जाएगा। इसकी वज़ह बस एक होगी- आपकी रहस्‍यमयी चुप्‍पी।

एक पत्रकार लड़ रहा है। उसको काम नहीं करने दिया जा रहा। चिराग पटेल नाम के एक पत्रकार का शव जली हुई स्थिति में संदिग्‍ध हालातों में मिला है। हालांकि जो स्‍थानिय स्‍तर पर मुख्‍यधारा की मीडिया के वैकल्पिक समाधान की जुगत में हैं, उन्‍हें कुछ लठैत डराने, धमकाने और पीटने की धमकियां देते रहे हैं। यह बौख़लाहट स्‍पष्‍ट रूप से आपके मुल्‍क़ के पतन का कारण बन रही है। देखिएगा, यह देश कुछ धन्‍नाढ्य लोगों की ही कठपुतली बनकर रह जाएगा। आपकी आवाज़ें कहीं नहीं सुनाई पड़ेंगी। आप जब किसी पत्रकार के इंतज़ार में होंगे तो कोई भी आता नज़र नहीं आएगा। याद रखिए।

और ज़ुल्‍म के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद करना सीखिए। अपनी चुप्‍पी तोड़िए। आप अपने नेता से सवाल करके भी प्‍यार कर सकते हैं। वोट दे सकते हैं। लेकिन एक चेहरे की आड़ में कुछ भी होते मत देखिए।

पुण्‍य प्रसून बाजपेयी जी, आप हमारी ऊर्जा हैं। आपकी निर्भीकता हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

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