ख़ालिद सैफ़ी ने जेल से लिखा भावपूर्ण ख़त, परिवार को याद किया

सामाजिक कार्यकर्ता ख़ालिद सैफ़ी पिछले बारह माह से ज़ेल में हैं। दिल्‍ली दंगों से संबंधित मामले में गिरफ्तार किए गए थे। सैफ़ी और उनके साथियों ने मिलकर एक संगठन बनाया था- यूनाइटेड अगेंस्‍ट हेट। जिसका काम था मुसलमानों, अन्‍य अल्‍पसंख्‍यकों एवं दलितों के खिलाफ हिंसा के विरूद्ध आवाज़ उठाना और हिंसा और नफ़रत की सारी घटनाओं का रिकॉर्ड रखना तथा शिकार लोगों तक सहायता पहुंचाने का प्रयास करना।

ख़ालिद सैफ़ी का कुछ दिन पहले ही एक वीडियो बाहर आया था जिसमें जुनून और साहस का परिचय दे रहे थे।

अभी द वायर हिंदी पर ख़ालिद सैफ़ी का एक ख़त छपा है जो उन्‍होंने जेल से अपने बच्‍चों के नाम लिखा है। यह ख़त पढ़ा जाना चाहिए। इस ख़त में सैफ़ी फूलों से दोस्‍ती की बात करते हैं और कांटों में रहकर भी किस तरह गुल खुशबू ही फैलाते हैं, कुछ वैसा ही होने की इच्‍छा रखते हैं।

फूलों में अपने परिवार को महसूस करते ख़ालिद सैफ़ी ने बेहद भावपूर्ण लिखा-

मैं अक्सर नमाज़ के बाद अल्लाह की खूबसूरत मखलूक को देखता रहता था. उन फूलों को देखकर मुझे बहुत कुछ याद आने लगा. किसी फूल में मुझे अपनी अम्मी नज़र आती थी, तो किसी फूल में मुझे अपना परिवार नज़र आता था.

उस पौधे में एक गुच्छा था चार फूलों का, जिसमें मुझे नरगिस, यसा, ताहा और मरियम नज़र आते थे. तीन चार दिन पूरे शबाब पर रहने के बाद धीरे-धीरे सारे फूल मुरझा गए. उनकी पंखुड़ियां बेरंग हो गई और गिरने लगीं.

जेल में तमाम यातनाओं और मुश्‍किलों से सीखते ख़ालिद खुद से कहते हैं-

‘ख़ालिद, ज़िंदगी इन फूलों की तरह होनी चाहिए, मुश्किलों में पलकर भी अपना वजूद क़ायम करना, मुस्कुराते रहना और दूसरों को राहत पहुंचाना. और जब तुम पर उदासी या मुसीबत आए, तो तुम्हारे चाहने वाले भी हो और तुम्हारे लिए दुआ करें जब ज़िंदगी का आख़िरी पड़ाव हो, तब भी खुद को फ़ना कर के दूसरों के काम आना.’

इस ख़त से जेल में बंद ख़ालिद सैफ़ी की मनोदशा को समझा जा सकता है। वो नकारात्‍मक विचारों का भी सामना कर रहे हैं मगर कुछ कलियों को देखकर फ़ौरन क़ुरान की आयत दिल में संभालकर रख लेते हैं-

إِنَّ مَعَ الْعُسْرِ يُسْرًا  (मुश्किलों के साथ, राहत भी है)

जेल से लिखा गया यह बेहद नाज़ुक एवं भावपूर्ण ख़त है जो ज़िंदादिली को दर्शाता है। सलाख़ों में एक बरस बंद व्‍यक्‍ति इतना सुंदर एवं सकारात्‍मक सोच सकता है, यही उनकी जीत है। उन्‍होंने दिल्‍ली दंगों में क्या किया? यह तो न्‍यायालय तय करेगा लेकिन दिल से वो जीते हुए हैं।    

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